दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ा 60 % . 10 मई 2017 से लागू इस फैसले पर मिडिया ,राजनैतिक दल , समाजसेवी और जनता सभी खामोश हैं. इस खबर को लोगों ने कोई महत्त्व नहीं दिया। अब सुबिधाओं के बदले हम पैसा खर्च करने की नियत तैयार कर चुके हैं। सोचने की बात है कि जनहित के मुद्दों पर हायतौबा मचाने वाले विपक्षी राजनैतिक दल दिल्ली मेट्रो के इस बड़े फैसले को क्यों चुपचाप दबा गए। तनख्वाह में तो इतना इज़ाफ़ा नहीं किया है सरकार ने फिर किराये में इतनी भरी वृद्धि का औचित्य क्या है?
मेट्रो को अब जनता की बढ़ती भीड़ से काफी महंगे दाम पर विज्ञापन मिल रहे हैं तर्क होता है कि आपका विज्ञापन एक दिन में लाखों आँखें देखती हैं। एक तरफ हमारी मेट्रो तक पहुँच से पैसा कमाया जा रहा है दूसरी तरफ थोक में ( 60 %) किराया बढाकर जनता की जेब ढीली की जा रही है। पिछले साल नवम्बर में नोट बंदी के समय लोगों ने मेट्रो कार्ड को हज़ारों रुपयों से रिचार्ज कर लिया था उस राशि को जल्दी से जल्दी ख़त्म करने के लिए भी ऐसा अभूतपूर्व कदम उठाया गया है।
दिल्ली की जनता भी महान है जिसने मेट्रो के इस बेदर्द बेतुके फैसले को सर झुकाकर स्वीकार कर लिया। किराया वृद्धि की अगली क़िस्त आगामी अक्टूबर माह में फिर आने वाली है।
@vinod Sharma Veenu